Monday, 21 December 2015

पवित्र नदी सरयु में समाधि


भगवान श्री राम का जन्म अयोध्या में हुआ। उनके पिता का नाम दशरथ और माता का नाम कौशल्या था। श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में जाना जाता है। उनकी जिंदगी काफी संघर्षों से भरी हुई थी। उन्होंने अपने समय के बड़े-बड़े दानवों का संहार किया और उस समय के सबसे बड़े दानव रावण का भी अंत कर दिया।
भगवान विष्णु के 7वें अवतार
हिन्दू धर्म में श्रीराम, श्रीविष्णु के 10 अवतारों में, सातवें अवतार हैं। राम का जीवनकाल एवं पराक्रम, महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित, संस्कृत भाषा में रचित महाकाव्य रामायण के रूप में लिखा गया है। जिसके रचियता थे 'महर्षि वाल्मीकि' और फिर गोस्वामी तुलसीदास ने रामकथा को अवधी में 'श्रीरामचरितमानस' नाम से रचा था।
राम, अयोध्या के राजा दशरथ और रानी कौशल्या के सबसे बडे पुत्र थे। राम की पत्नी का नाम सीता था (सीता जी, देवी लक्ष्मी का अवतार हैं) और इनके तीन भाई थे- लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न। भगवान शंकर के रुद्र अवतार हनुमानजी, भगवान राम के सबसे बड़े भक्त माने जाते है।
पवित्र नदी सरयु में समाधि
लेकिन यह रहस्य बहुत कम लोगों को मालूम है कि श्रीराम की मृत्यु कैसे हुई? दरअसल भगवान श्रीराम की मृत्यु एक रहस्य है जिसका उल्लेख सिर्फ पौराणिक धर्म ग्रंथो में ही मिलता है।
पद्म पुराण के अनुसार भगवान श्रीराम ने सरयु नदी में स्वयं की इच्छा से समाधि ली थी। इस बारे में विभिन्न धर्मग्रंथों में विस्तार से वर्ण मिलता है। श्रीराम द्वारा सरयु में समाधि लेने से पहले माता सीता धरती माता में समा गईं थी और इसके बाद ही उन्होंने पवित्र नदी सरयु में समाधि ली।
पद्म पुराण में हैं 55हजार श्लोक
त्रेतायुग में रामराज्य यानी भगवान श्री राम ने ग्यारह हजार वर्षों तक शासन किया। इस बात का उल्लेख वाल्मीकि रामायण में मिलता है। महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित सभी अठारह पुराणों की गणना में 'पदम पुराण' को द्वितीय स्थान प्राप्त है। जिसमें श्लोक संख्या पचपन हजार है।

Tuesday, 15 September 2015

KRISHNA

jye KRISHNA

तू सबकुछ कर पर किसी को परेशान मत कर

तू सबकुछ कर पर किसी को परेशान मत कर
जो बात समझ न आऐ उस बात मे मत पड
पैसे के अभाव मे जगत 1% दूखी है,
समझ के अभाव मे जगत 99% दूखी है।
जितना बडा प्लाट होता है उतना बडा बंगला नही होता जितना बडा बंगला होता है उतना बडा दरवाजा नही होता जितना बडा दरवाजा होता है उतना बडा ताला नही होता जितना बडा ताला होता है उतनी बडी चाबी नही होती ।
परन्तु चाबी पर पुरे बंगले का आधार होता है।
इसी तरह मानव के जीवन मे बंधन और मुक्ति का आधार मन की चाबी पर ही निर्भर होता है।
है मानव....

जो बात समझ न आऐ उस बात मे मत पड

पैसे के अभाव मे जगत 1% दूखी है,

समझ के अभाव मे जगत 99% दूखी है।