Friday, 15 July 2011

सनातन धर्म को गाली मत दो आज गुरु पूर्णिमा है

  1. गुरुपूर्णिमा के दिन आश्रमों में लगा रहा मेला - पर सूना सूना रहा मन्दिरों का अंगना |
वह सभी मन्दिरों को पूजने वाले आज मन्दिरों में कम संख्या में पहुंचे | मंदिरके पुजारी जी ने बताया की ,कृष्ण जन्माष्टमी ,राम नवमी आदि पर्वों पर मन्दिरों में काफी भीड़  रहती है |अमावस्या पूर्णिमा को भी काफी भीड़ जुटती हे |परन्तु लोग गुरु पूर्णिमा वाले दिन अपने अपने गुरुओं के आश्रमों और डेरों पर ही जाना पसंद करते हैं |
                                                                                       में भी आज गुरु पूर्णिमा वाले दिन मन्दिर में कुछ स्पेशल सामग्री लेकर माथा टेकने गया था | ना कोई लाइन ना कोई धका - मुकी खुले दर्शन ना कोई रोक - टोक, मेरे हाथ में पूजा की थाली देख कर पुजारी जी भी परसन मुद्रा में मिले बड़े प्रेम पूर्वक उन्होंने पूजा करवाई |
Guru Mantra
यही हे वह गुरु मन्त्र जो स्पष्ट कह रहा है कि जो शाक्षात परब्रह्म हो उस जेसे गुरु को मेरा नमन |
अब विचार  कीजिये कि इन के जेसा या इन के बराबर का 
गुरु इस दुनिया में कोंन है , जब कि हमारा खुद का मत है कि मेरे जैसा या अमुक व्यक्ति जेसा बन कर तो दिखाओ | तो क्या इन जेसा कोई पैदा हो सकता है ?या कोई व्यकती जिसे हम गुरु मान कर आज पूज रहे हैं इनके समान है भी , इनका ना जन्म लेना ना मृत्यु को प्राप्त होने का गुण ही इन को ब्रह्मा - विष्णु - महेश आदि बनाता है | अतः खुद ही प्रमाणित हो जाता है कि इनके सिवा किसी और का इन के समान या इन के जेसा कहलाना ही सनातन धर्म को गाली देने के बराबर है |

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