Thursday, 10 November 2011

कर्म का लेख मिटे ना भाई, चाहे कोई लाख करे चतुराई








सत्कर्मो का संचय करें कर्म का लेख मिटे ना भाई पचास के दशक में उपरोक्त लाईन हर आदमी की जुबान पर होती थी। लोग जीवन में इसे हमेशा याद रखते थे और अपने आपको गलत कामों से दूर रखते थे। धीरे-धीरे दशक बीतते गए तथा इस लाईन का असर कम होने लगा। लोग भौतिकवाद में घुसते गए तथा अच्छे बुरे को भूलते गए। इस अंधे भौतिकवाद ने इंसान को मशीन बनाने की कोशिश की है, परंतु यह हो नहीं सकता। मनुष्य को अपने कर्मो का हिसाब देना पड़ता है, ऐसा हमारे धर्म ग्रंथ भी कहते हैं। आज के लोग अपने आपको विज्ञान के युग का मानते हैं तथा हर तर्क को विज्ञान की कसौटी पर कसते हैं। ऐसे लोगों के लिए यह घटना इस बात को सत्यापित करेगी कि मनुष्य को अपने कर्मो का हिसाब देना पड़ता है। अमेरिका में एक महिला बीमारी से ग्रसित थी, उसका इलाज किसी चिकित्सक से नहीं हो पा रहा था, आखिर में उसको मनोचिकित्सक के पास लाया गया। उस चिकित्सक ने उस महिला को सम्मोहन विधि के द्वारा उससे उसके जीवन की अनसुलझी गुत्थियों के बारे में पूछा। जिससे महिला ने अपने पुराने 89 जन्मों का ब्योरा उस चिकित्सक को बताया। चिकित्सक ने उसके कुछ जन्मों को सत्यापित कराया जो सही पाए गए। रहस्योद्घाटन में उन्होंने यह माना कि उक्त महिला पूर्व जन्मों के कर्मो के हिसाब से अगले जन्म में सुख या दु:ख भोगती गई तथा इस जन्म की व्याधि भी पूर्व जन्म के कर्मो के कारण ही थी। इस घटना के बाद उस महिला के जीवन में बहुत बदलाव आया। अब जब यह तथ्य वैज्ञानिक कसौटी पर खरा उतरा है तो हमें भी इसको मानकर अपने कर्मो के बारे में यह सोचना चाहिए कि यह किसी प्रकार से बुरे कर्मो की श्रेणी में तो नहीं आते। इससे किसी का अहित तो नहीं होता, समाज की व्यवस्था तो नहीं बिगड़ती। रामचरितमानस में भी कहा गया है कि कर्म प्रधान विस्व रचि राखा, जो जस करहिं सो तस फल चाखा। हर व्यक्ति अपने बुढ़ापे के लिए धन संचय करके रखता है, तो उसी प्रकार हमको भी अपने अगले जन्म के लिए अच्छे कर्मो का संचय करना चाहिए। इस सत्य को जीवन में आत्मसात करना चाहिए कि कर्म का लेख मिटे ना भाई, चाहे कोई लाख करे चतुराई। कर्म का लेख मिटे ना भाई, चाहे कोई लाख करे चतुराई






















































































 चाहे कोई लाख करे चतुराई,नही  छुपती सचाई 

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