Friday, 6 April 2012

श्रीकृष्ण की अध्ययन पाठशाला सांदीपनि आश्रम

की अध्ययन पाठशाला सांदीपनि आश्रम
यूं तो भगवान श्रीकृष्ण की बाललीला, रासलीला और कर्मलीला के दर्शन  वृंदावन और मथुरा में होते हैं लेकिन मध्य प्रदेश के  उज्जैन शहर में भगवान श्रीकृष्ण की यादों से जुड़ी एक ऐसी स्थली भी है जहां रहकर उन्होंने शिक्षा ग्रहण की थी।
उज्जैन में भगवान श्रीकृष्ण के  गुरु सांदीपनि का आश्रम है, जहां रहकर बड़े भाई बलराम और मित्र सुदामा के साथ भगवान श्रीकृष्ण ने   शिक्षा ग्रहण की थी। इस आश्रम में वह गौमती कुंड भी है, जहां श्रीकृष्ण, बलराम और सुदामा अपनी अंक पट्टिका  यानी वह तख्ती धोया करते थे जिस पर गुरु सांदीपनि उन्हें लेखन का कार्य कराते थे। इस आश्रम में जहां गुरु सांदीपनि की प्रतिष्ठा ऊंचे सिंहासन पर प्रतिष्ठित है तो उसके नीचे बलराम, भगवान श्रीकृष्ण व मित्र सुदामा की प्रतिमाएं ऐसे ही प्रतिष्ठित हैं जैसे आज भी वे अपने गुरु से ज्ञान प्राप्त कर रहे हों। इसी परिसर में भगवान शिव का वह 6 हजार साल पुराना प्रतिष्ठित मंदिर भी है, जहां महर्षि सांदीपनि ने भगवान शिव पर बिल्व पत्र चढ़ाकर घोर तपस्या की थी। इस विशाल शिवलिंग के चारों तरफ लिपटा हुआ नाग भी उसी पत्थर से बना है जिससे निर्मित होकर भगवान शिव प्राय: प्रतिष्ठित हैं।
भारत में शायद ही कोई दूसरा शिवालय हो जहां शिवलिंग के साथ ही नागदेव उसी पत्थर से प्रतिष्ठित हुए हों जिससे कि भगवान सर्वेश्वर का शिवलिंग है। यहां करीब तीन हजार साल पुराने नंदी आकर्षण का केंद्र है वहीं पुरातत्व विभाग के संरक्षण में इस आश्रम    को राष्ट्रीय स्मारक का महत्व प्राप्त है।

                                                  

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