Sunday, 29 April 2012

सूर्योदय से पूर्व पीपल पर दरिद्रता और सूर्योदय के बाद लक्ष्मी जी का अधिकार

हिंदू धर्म में पीपल के वृक्ष को बहुत ही पवित्र माना गया है। ऐसी मान्यता है कि जिसके घर में पीपल का वृक्ष होता है उसके घर कभी दरिद्रता नहीं आती और सुख-शांति बनी रहती है। विज्ञान ने भी पीपल के वृक्ष के महत्व को माना है। यहां हम आपको बता रहे हैं पीपल के वृक्ष से जुड़े कुछ तंत्र उपाय, जिससे आपकी कई समस्याओं का निदान हो जाएगा।

उपाय

धन प्राप्ति के लिए

पीपल के पेड़ के नीचे शिव प्रतिमा स्थापित करके उस पर प्रतिदिन जल चढ़ाएं और पूजन-अर्चन करें। कम से कम 5 या 11 माला मंत्र का जप(ऊँ नम: शिवाय) करें। कुछ दिन नियमित साधना के बाद परिणाम आप स्वयं अनुभव करेंगे। प्रतिमा को धूप-दीप से शाम को भी पूजना चाहिए।

हनुमानजी की कृपा पाने के लिए

हनुमानजी की कृपा पाने के लिए भी पीपल के वृक्ष की पूजा करना शुभ होता है। पीपल के वृक्ष के नीचे नियमित रूप से बैठकर हनुमानजी का पूजन, स्तवन करने से हनुमानजी प्रसन्न होते हैं और साधक की हर मनोकामना पूरी करते हैं।

शनि दोष से बचने के लिए

शनि दोष निवारण के लिए भी पीपल की पूजा करना श्रेष्ठ उपाय है। यदि रोज पीपल पर जल चढ़ाया जाए तो शनि दोष की शांति होती है। शनिवार की शाम  पीपल के नीचे दीपक लगाएं और पश्चिममुखी होकर शनिदेव की पूजा करें तो और भी लाभकारी होता है।ऐसे कई धारणाये पीपल के वृक्ष को ले कर हम जी रहे हैं वास्तव में मूले विष्णु:स्थितो नित्यं स्कंधे केशव एव च।
नारायणस्तु शाखासु पत्रेषु भगवान हरि:।।
फलेऽच्युतो न सन्देह: सर्वदेवै: समन्वित:।।
स एवं ष्णिुद्र्रुम एव मूर्तो महात्मभि: सेवितपुण्यमूल:।
यस्याश्रय: पापसहस्त्रहन्ता भवेन्नृणां कामदुघो गुणाढ्य:।।
स्कंदपुराण/नागरखंड 247/41-42, 44
अर्थात ‘पीपल की जड़ में विष्णु, तने में केशव, शाखाओं में नारायण, पत्तों में भगवान हरि और फल में सब देवताओं से युक्त अच्युत सदा निवास करते हैं। यह वृक्ष मूर्तिमान श्री विष्णुस्वरूप है। महात्मा पुरुष इस वृक्ष के पुण्यमल मूल की सेवा करते हैं। इसका गुणों से युक्त और कामनादायक आश्रय मनुष्यों के हजारों पापों का नाश करने वाला है।’
जो मनुष्य पीपल के वृक्ष को देखकर प्रणाम करता है, उसकी आयु बढ़ती है तथा जो इसके नीचे बैठकर धर्म-कर्म करता है, उसका कार्य पूर्ण हो जाता है। जो मूर्ख मनुष्य पीपल के वृक्ष को काटता है, उसे इससे होने वाले पाप से छूटने का कोई उपाय नहीं है। (पद्म पुराण, खंड 7 अ 12)
शनिदेव कहते हैं ‘मेरे दिन अर्थात शनिवार को जो मनुष्य नियमित रूप से पीपल के वृक्ष का स्पर्श करेंगे, उनके सब कार्य सिद्ध होंगे तथा मुझसे उनको कोई पीड़ा नहीं होगी। जो शनिवार को प्रात: काल उठकर पीपल के वृक्ष का स्पर्श करेंगे, उन्हें ग्रहजन पीड़ा नहीं होगी।
(ब्रह्मपुराण, अ 118)
गीता में भगवान श्रीकृष्ण स्वयं कहते हैं : 

‘अश्वत्थ: सर्ववृक्षाणाम्’

अर्थात मैं सब वृक्षों में पीपल का वृक्ष हूं।
वैज्ञानिक दृष्टि से पीपल रात-दिन निरंतर 24 घंटे आक्सीजन देने वाला एकमात्र अद्भुत वृक्ष है। इसके निकट रहने से प्राणशक्ति बढ़ती है। इसकी छाया गॢमयों में ठंडी और सॢदयों में गर्म रहती है। इसके अलावा पीपल के पत्ते, फल आदि में औषधीय गुण होने के कारण यह रोगनाशक भी होता है।
इसके नित्य स्पर्श से रोग-प्रतिरोधक क्षमता की वृद्धि, मन:शुद्धि, आलस्य में कमी, शरीर के आभामंडल की शुद्धि, विचारधारा में धनात्मक परिवर्तन, ग्रहपीड़ा का शमन तथा लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। बालकों के लिए पीपल का स्पर्श बुद्धिवर्धक है। बुद्धू और बुद्धू विद्यार्थी भी नित्य पीपल का स्पर्श करे तो कुछ ही दिनों में उसकी बुद्धि में चमत्कारिक परिवर्तन देखने को मिलेगा। रविवार को पीपल का स्पर्श नहीं करना चाहिए।
पद्म पुराण के मतानुसार पीपल को प्रणाम करने और उसकी परिक्रमा करने से आयु लम्बी होती है। जो व्यक्ति इस वृक्ष को पानी देता है, वह सभी पापों से छुटकारा पाकर स्वर्ग को जाता है। पीपल में पितरों का वास माना गया है। इसमें सब तीर्थों का निवास भी होता है। इसीलिए मुंडन आदि संस्कार पीपल के नीचे करवाने का प्रचलन है।
पीपल की जड़ के पास बैठकर जो जप, होम स्रोत-पाठ और यंत्र-मंत्रादि के अनुष्ठान किए जाते हैं उन सबका फल करोड़ गुणा होता है। जिसकी जड़ में साक्षात ब्रह्मा जी स्थित हैं उसे संसार में कौन नहीं पूजेगा? पीपल की सात बार प्रदक्षिणा करने से दस हजार गऊओं के और इससे अधिक अनेकों बार परिक्रमा करने पर करोड़ों गऊओं के दान का फल प्राप्त होता है। अत: पीपल की परिक्रमा सदा करनी चाहिए।
महिलाओं में यह विश्वास है कि पीपल की निरंतर पूजा-अर्चना, परिक्रमा करके जल चढ़ाते रहने से संतान की प्राप्ति होती है, पुत्र उत्पन्न होता है, पुण्य मिलता है। अदृश्य आत्माएं तृप्त होकर सहायक बन जाती हैं।
कामना पूॢत के लिए पीपल के तने से सूत लपेटने की भी परंपरा है। पीपल की जड़ में शनिवार को जल चढ़ाने और दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है।
शनि की जब साढ़ेसाती दशा होती है तो लोग पीपल के वृक्ष का पूजन और परिक्रमा करते हैं क्योंकि भगवान कृष्ण के अनुसार शनि की छाया इस पर रहती है। पीपल की छाया यज्ञ, हवन, पूजा-पाठ, पुराण कथा आदि के लिए श्रेष्ठ मानी गई है। पीपल के पत्तों से शुभ काम में वंदनवार भी बनाए जाते हैं।
वातावरण के दूषित तत्वों, कीटाणुओं को विनष्ट करने के कारण पीपल को देवतुल्य माना जाता है। धाॢमक श्रद्धालु लोग इसे मंदिर परिसर में अवश्य लगाते हैं। सूर्योदय से पूर्व पीपल पर दरिद्रता का अधिकार होता है और सूर्योदय के बाद लक्ष्मी जी का अधिकार होता है। इसीलिए सूर्योदय से पहले इसकी पूजा करना निषेध किया गया है। इसके वृक्ष को काटना या नष्ट करना ब्रह्म हत्या के तुल्य पाप माना गया है। रात में इस वृक्ष के नीचे सोना अशुभ माना जाता है।
पीपल के समान दूसरा कोई वृक्ष नहीं है। पीपल वृक्ष के रूप में साक्षात श्री हरि ही इस भूतल पर विराजमान हैं। संसार में पीपल का वृक्ष अत्यंत पूजनीय माना गया है। पीपल को रोपने, रक्षा करने, छूने तथा पूजने से वह क्रमश: धन, पुत्र, स्वर्ग और नीम के दस वृक्ष लगाने का जो फल होता है, पीपल का एक वृक्ष लगाने से भी वही फल होता है।
पीपल को जल देने से दरिद्रता, दुस्वप्र, दुश्चिता तथा संपूर्ण दुख नष्ट हो जाते हैं। जो बुद्धिमान पीपल के पेड़ की पूजा करता है उसने अपने पितरों को तृप्त कर दिया, भगवान विष्णु की आराधना कर ली तथा सम्पूर्ण ग्रहों का भी पूजन कर लिया। शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए ‘ú नम: शिवाय’ का 108 बार जाप करने से दुख, कठिनाई एवं ग्रहदोषों का प्रभाव शांत हो जाता है।
घर में पीपल का वृक्ष होना उचित नहीं है परन्तु खुली जगह में पश्चिम दिशा में पीपल सम्पत्तिकारक है।

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