Monday, 21 May 2012

ऐतिहासिक गद्दी श्री सिद्ध किराना

ऐतिहासिक गद्दी श्री सिद्ध किराना


देश के विभाजन से पूर्व जिला सरगोधा (पाकिस्तान) की पहाडिय़ों पर ऐतिहासिक गद्दी श्री सिद्ध किराना स्थित थी। इसे श्री गुरु गोरक्ष नाथ जी का आशीर्वाद रहा है। गुरु गोरक्षनाथ जी के सवा लाख शिष्य थे। प्रत्येक शिष्य को गुरु गोरक्षनाथ जी ने अलग-अलग सेवा नियुक्त कर रखी थी। अपने प्रमुख शिष्य राजा भर्तृहरि  जी को उन्होंने गायों को जंगल में ले जाने की सेवा दे रखी थी। एक दिन राजा भर्तृहरि  जब शाम को आश्रम में लौटे तो भंडारी से उन्होंने रोट का प्रसाद मांगा। भंडारी ने कहा कि प्रसाद तो समाप्त हो गया। तब राजा भर्तृहरि  बोले मेरे लिए प्रसाद क्यों नहीं रखा? तो भंडारी ने कहा, ‘यह टिल्ला है मार सिर, ले जा इसे भी।’

भर्तृहरि  जी महाराज के पास घास खोदने वाला खुरपा था और वह ऋद्धि-सिद्धि का टिल्ला था जहां महाराज श्री गुरु गोरक्षनाथ जी ध्यान-साधना-भजन करते थे। राजा भर्तृहरि ने खुरपा मारकर आधा टिल्ला उठा लिया और पवनरूप होकर चल दिए। जब भंडारी ने यह देखा तो वह घबरा गया। भंडारी भी सिद्ध पुरुष शिष्य था। वह भी पवनरूप होकर गुरु गोरक्षनाथ जी के पास पहुंचा और गुरु गोरक्षनाथ जी को सारी बात बताई। गुरु गोरक्षनाथ पवनरूप होकर भर्तृहरि  जी से आगे मिले, जब भर्तृहरि  जी ने अपने गुरु को देखा तब राजा भर्तृहरि ने अपने गुरु जी को प्रणाम करने की कोशिश की और गुरु की कण्ठी से गुरु सेवा करने के लिए उस रिद्धि-सिद्धि के पहाड़ को नीचे रखने की कोशिश की। तब गुरु गोरक्षनाथ जी ने कहा-बेटा ठहर, अगर इसे सीधा रखेगा तो यह चांदी का बन जाएगा और वह हमारे किस काम का इसलिए इसको तिरछा रख। तब राजा भर्तृहरि  ने श्री गुरु के वचनानुसार पहाड़ को तिरछा रख दिया। तत्पश्चात श्री गुरु के चरणों में प्रणाम किया तथा कण्ठी से श्री गुरु की पूजा की

पूजा करने के पश्चात गुरु गोरक्ष नाथ जी ने कहा, बेटा इसे उठा और चल वापस। भर्तृहरि  जी ने कहा महाराज आपके चरण कमल यहां पड़ गए हैं और आपका आशीर्वाद भी मिल गया। अब इसे यही रहने दें। गुरु गोरक्षनाथ जी ने कहा-अच्छा यह सिद्ध किराना के नाम से आबाद होगा। यहां बड़े-बड़े संतों को डेरा रहेगा। तब से गद्दी सिद्ध किराना का जन्म हुआ। विभाजन के समय पाकिस्तान में इस गद्दी  पर पीर प्रेम दास जी विराजमान थे। इस गद्दी के बारे में धारणा है कि जो सच्चे मन से यहां मन्नत मांगता है उसकी हर मन्नत पूरी होती है।

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