Monday, 4 June 2012

सब प्रकार की शक्तियों का समन्वय माता वैष्णो देवी

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सब प्रकार की शक्तियों का समन्वय माता वैष्णो देवी

सब प्रकार की शक्तियों का समन्वय माता वैष्णो देवी


माता वैष्णो देवी के स्वरूप में मनुष्य के लिए आवश्यक सब प्रकार की शक्तियों का समन्वय है। उनमें शक्ति के सृजनशील, पालक तथा विघटनकारी तीनों रूपों की अभिव्यक्ति है। आज  मानव को सफलता प्राप्त करने के लिए उचित मात्रा में शक्ति की आवश्यकता है। उसके लिए ज्ञान, बुद्धि, धन, सौभाग्य तथा दुष्ट प्रवृत्तियों के प्रभावों से संरक्षण आवश्यक है।


वैष्णो देवी एक सर्वकालिक शक्ति हैं। उनकी उपयोगिता अतीत में थी, वर्तमान में है तथा भविष्य में भी रहेगी। वह अपने भक्तों की शक्ति को उचित मात्रा व दिशा में बनाए रख कर संसार व समाज और ब्रह्मांड में शक्ति का उचित संतुलन बनाए रखती हैं। समस्त ब्रह्मांड उन्हीं की ऊर्जा से प्रज्जवलित है। हिंदू पुराणों के अनुसार ब्रह्मा सृष्टि के सृजनहार हैं। सृष्टि के सृजन के लिए आवश्यक सृजन शक्ति उन्हें उनकी सहगामिनी महासरस्वती से प्राप्त होती है।

हिन्दू धर्म में भगवान विष्णु मानव जीवन के इसी पक्ष की देखभाल करते हैं। उनकी जीवन संगिनी महालक्ष्मी हैं। महालक्ष्मी सौभाग्य, धन, समृद्धि, उदारता तथा सौष्ठव की देवी मानी गई हैं। लक्ष्मी शब्द की उत्पत्ति लक्ष्य से हुई है अर्थात वह मनुष्य की लक्ष्यपूर्ति में सहायता करती हैं। वह भगवान विष्णु के साथ मिलकर संसार का पालन-पोषण करती हैं तथा उन्हें सुखी व समृद्ध बनाती हैं। कालचक्र में पड़ कर जब संसार के समस्त जड़ तथा जीव पदार्थ निरर्थक हो जाते हैं तो सृष्टि का संतुलन बनाए रखने के लिए इनका विघटन अत्यंत आवश्यक हो जाता है।

यही वह समय है जब नवीन सृजन तथा निर्माण संभव होता है। यह अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य भगवान शिव अपनी सहचरी महाकाली के सहयोग से संपन्न करते हैं। ‘काली’ शब्द की उत्पत्ति काल से हुई है जिसका अर्थ है समय। महासरस्वती, महालक्ष्मी तथा महाकाली की पूजा स्वतंत्र दैवी शक्तियों के रूप में तथा अपने-अपने पतियों की सहचरियों के रूप में की जाती है। महासरस्वती प्रज्ञा, चातुर्य, कला, शिल्प, संगीत ज्ञान तथा विज्ञान की अधिष्ठात्री देवी हैं। सृजन के लिए ये सब गुण अनिवार्य हैं। सृजन की निरंतरता और अनुपालन आवश्यक है।

‘शक्ति’ परमात्मा का नारी रूप है। उसमें परमात्मा का क्रियाशील रूप प्रदर्शित होता है जोकि सृष्टि तथा सृष्टि का निमित्त दोनों है। उनका यह क्रियाशील रूप ही माया की सृष्टि करता है। मनुष्य के लिए आवश्यक सब शक्तियों का उनमें समावेश है। जिस प्रकार भगवान विष्णु ने धर्म की स्थापना तथा अधर्मियों के नाश और नियंत्रण  के लिए समय-समय पर विभिन्न नाम, रूपों में अवतार धारण किए, उसी प्रकार उनकी शक्ति ने भी अवतार लेकर अधर्म और अत्याचार करने वाले दानवों का नाश तथा सज्जन लोगों को परित्राण किया।

यह शक्ति कभी शक्तिमान के साथ अवतरित होती है जैसे सीताराम, राधाकृष्ण व कहीं वह स्वतंत्र स्थिति में रहती है जैसे माता वैष्णो, माता ज्वालामुखी,  माता चिंतपूर्णी आदि। स्वतंत्र स्थिति में भी शक्ति सब प्रकार की समृद्धि और लोकसिद्धि देने वाली है।

शास्त्रों में भगवान विष्णु की शक्ति को वैष्णवी कहा गया है। वह सारे संसार का पालन करने वाली हैं। वह विष्णु की भक्त हैं, विष्णु के रूप वाली हैं और विष्णु की शक्तिस्वरूप हैं, विष्णु के द्वारा ही सृष्टि में सृजन की गई हैं, इसी कारण इन्हें वैष्णवी कहा गया है। जिस प्रकार भगवान विष्णु ने राम के रूप में रावण तथा कृष्ण के रूप में कंस का संहार किया था, उसी प्रकार उनकी शक्ति ने वैष्णवी रूप में महाबली दैत्यराज महिषासुर का वध किया था। पुराणों में वैष्णवी को अपने सेवकों का माता की तरह हित करने वाली बताकर उन्हें मातृकाओं में प्रमुख स्थान दिया गया है।

माता वैष्णो और उनकी पवित्र गुफा
जम्मू-कश्मीर में स्थित श्री वैष्णो देवी का मंदिर एक अद्वितीय पूजास्थल है जहां भगवान ब्रह्मा, विष्णु तथा शिव की शक्तियों की पूजा तीन पिण्डियों तथा मूॢतयों के रूप में की जाती है। इन्हीं शक्तियों को महासरस्वती, महालक्ष्मी तथा महाकाली नामों से पुकारा जाता है। भारत में केवल यही एक ऐसा स्थान है जहां इन तीन देवियों की पूजा एक साथ की जाती है। श्री वैष्णो देवी दैवी शक्ति के तीन सर्वोत्कृष्ट स्वरूपों का अवतार हैं, माता परम दयावती कल्याणी तथा उदार हृदय वाली हैं व भक्तों की समस्त कामनाएं पूर्ण करती हैं। भक्तों की ऐसी कोई भी भौतिक अथवा आध्यात्मिक इच्छा नहीं होती जिसे वह पूर्ण न कर सकती हों।

माता के इस मंदिर की बड़ी मान्यता है। माता वैष्णो देवी का मंदिर त्रिकुट पर्वतमाला के अंचल में स्थित है। यहां का प्राकृतिक सौंदर्य तथा शांतिमय वातावरण दर्शनीय है। जम्मू से कटरा तक अच्छी सड़क होने के कारण यहां तक किसी भी वाहन से सरलता से पहुंचा जा सकता है। उसके पश्चात तीर्थ यात्री पैदल, खच्चरों पर, पालकियों में अथवा पर जाते हैं। मार्ग में हमें भूमिका मंदिर, चरण पादुका, आदि कुमारी, हाथी माथा तथा दरबार के दर्शन होते हैं। वे मार्ग भर में भक्तिगीत गाते तथा ‘जय माता दी’ के नारे लगाते जाते हैं।

आधुनिक काल में माता वैष्णो की गुफा भारत वर्ष के लाखों यात्रियों की श्रद्धा का केंद्र बनी हुई है। समुद्र तल से 5700 फुट की ऊंचाई पर स्थित यह गुफा वास्तव में माता वैष्णो का मंदिर है जिसकी गणना आज उत्तर भारत के महान शक्ति तीर्थ के रूप में की जाती है। इस गुफा की लंबाई लगभग एक सौ फुट, चौड़ाई तीन फुट से छ: फुट, ऊंचाई दो फुट से लेकर छ: फुट तक है। चरणगंगा के उद्गम स्थान पर विद्यमान यह प्राकृतिक गुफा आज करोड़ों हिन्दुओं को अपनी ओर आकर्षित कर रही है।  

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