Sunday, 1 July 2012

गुरु की महिमा

गीता   | वेद-पुराण पढो या सुनो | परिचय  |श्री राम   | 




गुरुब्र्रह्मा गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वर:/

गुरु: साक्षात् परं ब्रह्म, तस्मै श्रीगुरुवे 


नम:।।

गुरु ब्रह्मा हैं, गुरु विष्णु हैं और गुरु ही देवाधिदेव महादेव हैं। गुरु साक्षात् परमात्मा के समान हैं। अत: गुरु को मेरा सर्वदा शत्-शत् नमन है। आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। गुरु पूर्णिमा यानी गुरु के प्रति आभार और कृतज्ञता प्रकट करने का दिन।इस  
दिनको लोग अक्सर भूल जाते हैं की गुरु ब्रह्मा हैं, गुरु विष्णु हैं और गुरु ही देवाधिदेव महादेव हैं।और उन गुरुओं की पूजा करने लगते हैं जो  गुरु साक्षात् परमात्मा के समान नही  हैं।
और गुरु ब्रह्मा हैं, गुरु विष्णु को अपमानित करने के आरोपी हो जाते हैं .ऐसे शिष्यों के भाग्य से यह और वोह परलोक दोनों ही मुसीबत में आजाते हैं ।

इस बार यह 3 जुलाई, मंगलवार को मनाया जाएगा।


जो अपने शिष्यों के कानों में ज्ञान रूपी अमृत घोलता है, वही गुरु है। जो अपने सदुपदेशों से अपने शिष्य को अज्ञान रूपी अंधकार से निकाल कर ज्ञान रूपी प्रकाश की ओर ले जाता है, वही गुरु है। जो अपने शिष्य के प्रति कृपा, दया, क्षमा और प्रेम का भाव रखता है, वही गुरु है। जो धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने की कला प्रदान करता है, वही गुरु है। जो वेद और पुराणों के रहस्य को समझाता है, वही गुरु है।


भारतीय संस्कृति का प्रतीक यह गुरु पूजा भारत भर में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में प्रसिद्ध है। गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। ऋषि वशिष्ठ के पौत्र और ऋषि पाराशर के पुत्र महर्षि व्यास का जन्म भी आषाढ़ पूर्णिमा को हुआ था। अत: गुरुओं के गुरु महर्षि व्यास की जन्मतिथि होने के कारण ही इस पूर्णिमा का नाम व्यास पूर्णिमा हुआ। व्यास जी ने वेदों का विस्तार किया, इसी कारण इन्हें वेदव्यास के नाम से पुकारा जाने लगा। इस पूर्णिमा को सबसे बड़ी पूर्णिमा कहा गया है, क्योंकि तीनों लोकों में ज्ञान को श्रेष्ठ और ज्ञानप्रदाता सद्गुरु को सर्वश्रेष्ठ माना गया है।


स्कन्दपुराण के उत्तरखंड में भगवान शिव ने शिव-पार्वती संवाद में जो गूढ़ रहस्य प्रतिपादित किया है, उसे महर्षि वेदव्यास ने ‘गुरु गीता’ नाम देकर गुरु महिमा फल प्राप्ति के रहस्य बताए हैं। गुरु महिमा या गुरु गीता पाठ उत्तर मुख शांति लाभ, पूर्व मुख वशीकरण, दक्षिण मुख मारण और पश्चिम मुख धन प्राप्ति के लिए उत्तम माना गया है। गुरु पूर्णिमा के दिन प्रात: कालीन कार्यों से निवृत्त हो सर्वप्रथम अपने गुरु का ध्यान करें, उपवास रखें। अपने गुरु को यथासंभव दक्षिणा दें। गुरु के अभाव में वटवृक्ष के नीचे बैठकर गुरु का ध्यान करें। वटवृक्ष के रक्षा सूत्र आदि बांधें। वट वृक्ष के पत्तों से गौ मूत्र या गंगा जल लेकर ‘ओम गुरवे नम:’ का उच्चारण करते हुए घर में छींटे दें।

इस दिन बैल और गाय को अनाज खिलाना काफी लाभकारी होता है। यथा संभव इस दिन किसी मंदिर, तीर्थ स्थल, वटवृक्ष, गंगा आदि  पवित्र स्थलों पर ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं। इस दिन गुरु  के सान्निध्य में रहने भर से नकारात्मक ऊर्जा कभी हावी नहीं होती।

No comments:

Post a Comment