हमारे शरीर से सर्वाधिक मात्रा में शक्ति का प्रवाह हमारे पैरों की उँगलियों से होता है, उसके पश्चात हाथों की उंगलियों के पोरों से| हाथ से भोजन ग्रहण करते समय, उँगलियों से निकलने वाली शक्ति भोजन में आवेशित हो जाती है और यह शक्ति भोजन को सुपाच्य बनाने में सहायता करती है|

हाथों मे नो ग्रह विराज मान हैं ,जो हमारे भाग्य की भविष्यवाणी कर ते हैं , अन धन सुख सम्पदा सभी कुछ इन्ही से प्राप्त होजाता है |पर आधुनिकता की आंधी हमें इन के साथ भोजन करने से रोकती है |यह कितना सही है ?जो देने वाला दाता हो उसके साथ बैठ कर खाना खाने में परहेज क्यों ???? 

चम्मच से जब तक हम भोजन लेकर उसे मुख में डालते हैं तब तक वह शक्ति चम्मच से प्रवाहित हो भोजन में नहीं जा पाती| अब आप बताएं कौन सा संस्कार अधिक उपयोगी, सभ्य एवं योग्य है ? ध्याम रहे वैदिक संस्कृति के प्रत्येक कृति उच्च कोटिके शास्त्र अध्यात्मशस्त्र आधारित है और सभ्यता का भी प्रतीक है !