Saturday, 18 August 2012

श्रीराम

गीता   | वेद-पुराण पढो या सुनो | परिचय  |श्री राम   |  अपना भविष्य खुद जाने  
गुण निधि श्रीराम
आपदामपहरतारं दातारं सर्व सम्पदम्।


लोकाभिरामं श्री रामं भूयो-भूयो नमाम्यहम्।


रामाय, रामभद्राय, राम चंद्राय मानसे।


रघुनाथाय, नाथाय, सीताया: पतये नम:।। 


प्रभु श्रीराम सभी आपत्तियों को हरने वाले तथा सब प्रकार के ऐश्वर्य 

प्रदान करने वाले हैं। वह सब को मनमोहक छवि से आनंद प्रदान 

करने वाले हैं। उनको बार-बार नमस्कार है। ऐसे रामभद्र, रामचंद्र 

सबके स्वामी, रघुनाथ जी, सीतापति जी को नमस्कार है।


ये प्रकट कृपाला, दीन दयाला कौशल्या हितकारी  चैत्र मास शुक्ल पक्ष की नवमी के दिन कौशल्या माता के गर्भ से प्रभु श्रीराम प्रकट हुए। जब इस धरा पर असुर प्रवृत्ति वालों का बोलबाला बढ़ गया, तब देवताओं की विनती पर प्रभुधरती पर आसुरी शक्तियों के नाश हेतु तथा भक्तों का कल्याण करने हेतु पधारे। उनके आने से संपूर्ण मानव जाति धन्य हो गई।

सनातन मर्यादा के मापदंड  के जो आदर्श उन्होंने स्थापित किए आज भी सम्पूर्ण मानव जाति उनसे प्रेरणा ले रही है इसलिए वह मर्यादा पुरुषोत्तम भी कहलाए। स्वयं सनातन परब्रह्म होते हुए भी उन्होंने साधारण मानव की भांति व्यवहार किया लेकिन जिन्होंने उन्हें परमपिता परमेश्वर के रूप में पहचाना उन्होंने उनकी अविरल एवं शुद्ध हृदयचित से भक्ति कर परमधाम को प्राप्त किया। प्रभु श्रीराम शत्रुओं को भी अभय देने वाले, शरणागत वत्सल हैं।

जब विभीषण जी उनकी शरण में अपने भाई रावण की लंका को त्याग कर आए, तब उनकी निष्ठा पर वानर सेना ने शंका जताई। तब प्रभु श्री राम बोले कि अगर कोई दुराचारी भी मेरी शरण में आता है, मैं तो उसका भी परित्याग नहीं करता। विभीषण तो पूर्णतया निष्पाप हैं। भगवान श्री राम ने बाली से किष्किन्धा तथा रावण से लंका जीतकर इन्हें अपने साम्राज्य में नहीं मिलाया अपितु किष्किन्धा का राज्य सुग्रीव को तथा लंका का राज्य विभीषण को दे दिया तथा वहां आर्य विधान स्थापित किया। प्रभु श्रीराम त्रेतायुग में आए।

आज भी उनकी यशोकीर्ति का गुणगान कर भक्त आनंदित होते हैं। उनके भक्तों में भरत जी, हनुमान जी, लक्ष्मण जी, जटायु, शबरी आदि भक्ति के विलक्षण उदाहरण हैं। प्रभु श्रीराम आदि पुरुष नारायण हैं। उनकी भार्या सीता जी प्रभु संग वैकुंठ से पधारीं। प्रभु श्री राम ने शस्त्र एवं शास्त्रों का ज्ञान महॢष वशिष्ठ, विश्वामित्र जी एवं अगस्तय मुनि जी से प्राप्त किया। भगवान श्रीराम गुणनिधि हैं एवं संपूर्ण ब्रह्मांड के अधिपति हैं, वह मायापति हैं। ब्रह्मांड निकाया निर्मित माया, रोम -रोम प्रति वेद कहैं। प्रभु श्रीराम की योगमाया के अंश मात्र से अनेकानेक ब्रह्मांडों की रचना हुई है, ऐसा वेद कहते हैं। प्रभु श्रीराम धर्म के साक्षात् विग्रह हैं।

रघुकुल रीति सदा चली आई। प्राण जाई पर वचन न जाई। अपने रघुवंश में चली आई परम्परा का निर्वहन करते हुए प्रभु श्रीराम जी ने चौदह वर्ष का वनवास स्वीकार किया तथा अपने पिता दशरथ के द्वारा माता कैकेयी को दिए वचनों की रक्षा की। भगवान श्री राम ने अयोध्या में ग्यारह हजार वर्षों तक राज किया। उनके राज्य में प्रजा अत्यंत सुखी थी। सबके मन निर्मल एवं शुद्ध थे। किसी के प्रति भी किसी के मन में ईष्र्या-द्वेष की भावना नहीं थी। सब लोग कत्र्तव्य पालन करते थे जिस प्रकार सूर्य, पृथ्वी से जल खींचकर, पुन: वर्षा के रूप में जल को पृथ्वी पर बरसा देता है, उसी प्रकार प्रजा से प्राप्त कर को, प्रजा के हित में लगाया जाता था।

इसी कारण आज भी हर राष्ट्र राम राज्य की कामना करता है। भगवान श्री राम जी ने समाज के हर वर्ग, हर जाति, समुदाय के लोगों को गले लगाया। चाहे वह पक्षीराज जटायु हो, चाहे केवट अथवा शबरी। भगवान श्री राम सम्पूर्ण मानव जाति के महानायक हैं। जब तक इस धरती पर जीवन रहेगा, सूर्य का प्रकाश रहेगा, तब तक प्राणी समुदाय भगवान श्री राम द्वारा स्थापित सनातन आर्य मर्यादा के मापदंडों से शिक्षा लेता रहेगा। भगवान श्री राम समस्त जगत के परम आश्रय हैं। वह सनातन धर्म के रक्षक हैं। जीव के अंतिम क्षणों में मुख से राम का नाम निकलना, मुक्ति प्रदाय है एवं मोक्ष प्रदायक है। प्रभु श्रीराम का नाम भव, भय एवं समस्त दुखों को हरने वाला है। 

आपदामपहरतारं दातारं सर्व सम्पदम्।
लोकाभिरामं श्री रामं भूयो-भूयो नमाम्यहम्।
रामाय, रामभद्राय, राम चंद्राय मानसे।
रघुनाथाय, नाथाय, सीताया: पतये नम:।।
प्रभु श्रीराम सभी आपत्तियों को हरने वाले तथा सब प्रकार के ऐश्वर्य प्रदान करने वाले हैं। वह सब को मनमोहक छवि से आनंद प्रदान करने वाले हैं। उनको बार-बार नमस्कार है। ऐसे रामभद्र, रामचंद्र सबके स्वामी, रघुनाथ जी, सीतापति जी को नमस्कार है।

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