Sunday, 19 August 2012

तीन वर्षों में एक बार आने वाला मलमास

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 हिंदू मान्यताओं के मुताबिक वैसे तो मलमास (अधिमास) में कोई शुभ कार्य नहीं होता है, लेकिन बिहार 

के नालंदा जिले के राजगीर में विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा की अनोखी परम्परा है। तीन वर्षों 

में एक बार आने वाला मलमास 18 अगस्त से प्रारम्भ होकर 16 सितंबर 2012 तक चलेगा इस दौरान 

राजगीर 

में विश्व प्रसिद्ध मेला लगता है और देश के साधु-संत यहां पहुंचते हैं। राजगीर पंडा समिति के सदस्य 

रामेश्वर पंडित कहते हैं कि इस एक महीने में राजगीर में काला काग को छोड़कर हिंदुओं के सभी 33 

करोड़ देवता राजगीर में प्रवास करते हैं। प्राचीन मान्यताओं और पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान 

ब्रह्मा के मानस पुत्र राजा बसु ने राजगीर के ब्रह्मकुंड परिसर में एक यज्ञ का आयोजन कराया था जिसमें 

33 करोड़ देवी-देवताओं को निमंत्रण दिया गया था और वह यहां पधारे भी थे परंतु काला काग (कौआ) 

को निमंत्रण नहीं दिया गया था।

जनश्रुतियों के मुताबिक इस एक माह के दौरान राजगीर में काला कौआ कहीं नहीं दिखता। इस क्रम में 

आए सभी देवी देवताओं को एक ही कुंड में स्नानादि करने में परेशानी हुई थी तभी ब्रह्मा ने यहां 22 कुंड 

और 52 जलधाराओं का निर्माण किया था। इस ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी में कई युगपुरुष, संत और 

महात्माओं ने अपनी तपस्थली और ज्ञानस्थली बनाई है। इस कारण मलमास के दौरान यहां लाखों साधु-

संत पधारते हैं। शनिवार को मलमास के पहले दिन हजारों श्रद्धालुओं ने राजगीर के गर्म कुंड में डुबकी 

लगाई और भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की। पंडित जयकुमार पाठक के मुताबिक अधिमास के दौरान 

जो मनुष्य राजगीर में स्नान, दान और भगवान विष्णु की पूजा करता है उसके सभी पाप कट जाते हैं 

और वह स्वर्ग में वास का भागी बनता है। वे कहते हैं कि इस महीने में राजगीर में पिंडदान की परंपरा 

है। किसी भी महीने में मौत होने पर मात्र राजगीर में पिंडदान से ही उनकी मुक्ति मिल जाती है।


अधिमास के विषय में उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म के अनुसार दो प्रकार के वर्ष प्रचलित हैं एक सौर वर्ष 

जो 365 दिन का होता है जबकि एक चंद्र वर्ष होता है जो आम तौर पर 354 दिन का होता है। इन 

दोनों वर्षों के प्रकार में करीब 10 दिन के अंतर होता है। 32 महीने के बाद इन दोनों प्रकार के वर्ष में 

एक चंद्र महीने का अंतर आ जाता है, यही कारण है कि तीन वर्ष के बाद एक वर्ष में एक ही नाम के दो 

चंद्र मास आ जाते हैं जिसे अधिमास या मलमास कहा जाता है। पाठक कहते हैं कि इस वर्ष 18 अगस्त 

से 16 सितंबर तक सूर्य संक्रांति का अभाव है जिस कारण भादो चंद्र मास अधिमास हुआ है।


पाठक के अनुसार इस महीने में विवाह, मुंडन, नववधू प्रवेश सहित सभी शुभ कार्य वर्जित होते हैं परंतु 

विष्णु की पूजा को सर्वोत्तम माना गया है। इधर, राजगीर में मलमास मेले का शुभारंभ प्रसिद्ध संत 

फलाहारी बाबा चिदात्मन जी महाराज के द्वारा धार्मिक अनुष्ठान और ध्वजारोहण के साथ हो गया है। 

उल्लेखनीय है कि राजगीर न केवल हिंदुओं के लिए धार्मिक स्थली है, बल्कि बौद्ध और जैन धर्म के 

श्रद्धालुओं के लिए भी पावन स्थल है।
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अधिक मास का प्रारंभ 18 अगस्त,2012 . शनिवार से हो चुका है। धर्मग्रंथों के अनुसार अधिक मास को भगवान पुरुषोत्तम ने अपना नाम दिया है इसलिए इस मास को पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं। इस मास में भगवान की आराधना करने का विशेष महत्व है।

धर्मग्रंथों के अनुसार इस महीने में सुबह सूर्योदय से पहले उठकर शौच, स्नान, संध्या आदि अपने-अपने अधिकार के अनुसार नित्यकर्म करके भगवान का स्मरण करना चाहिए और पुरुषोत्तम मास के नियम ग्रहण करने चाहिए। पुरुषोत्तम मास में श्रीमद्भागवत का पाठ करना महान पुण्यदायक है। इस मास में तीर्थों, घरों व मंदिरों में जगह-जगह भगवान की कथा होनी चाहिए। भगवान का विशेष रूप से पूजन होना चाहिए और भगवान की कृपा से देश तथा विश्व का मंगल हो एवं गो-ब्राह्मण तथा धर्म की रक्षा हो, इसके लिए व्रत-नियमादि का आचरण करते हुए दान, पुण्य और भगवान का पूजन करना चाहिए। पुरुषोत्तम मास के संबंध में धर्मग्रंथों में वर्णित है -

येनाहमर्चितो भक्त्या मासेस्मिन् पुरुषोत्तमे। 

धनपुत्रसुखं भुकत्वा पश्चाद् गोलोकवासभाक्।।


अर्थात- पुरुषोत्तम मास में नियम से रहकर भगवान की विधिपूर्वक पूजा करने से भगवान अत्यंत प्रसन्न होते हैं और भक्तिपूर्वक उन भगवान की पूजा करने वाला यहां सब प्रकार के सुख भोगकर मृत्यु के बाद भगवान के दिव्य गोलोक में निवास करता है।

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