Friday, 12 April 2013

नवरात्र के नौ दिनों में माता के नौ रूपों की पूजा



नवरात्र के नौ दिनों में माता के नौ रूपों की पूजा करने का विशेष विधान है। नवरात्रों के प्रथम दिन उपवास कर कलश की स्थापना की जाती है। नवरात्र में विधि विधान से मां का पूजन करने से कार्य सिद्ध होते हैं और चित को शांति मिलती है। साथ ही इन दिनों में जप-पाठ, व्रत अनुष्ठान, यज्ञ, दान आदि शुभ कार्य करने से व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है। आइए माता के इन नौ रूपों से आपका परिचय करवाते हैं। 

द्वितीय : आरती मां ब्रह्मचारिणी


‘भोला-भाला रूप मां तेरा’
दर्शन तेरे साकार करें दाती-मां तू बड़ी मेहरबान!
मां ब्रह्मचारिणी! अम्बे मैया करे-हर विपदा का निदान!!
दर्शन तेरे साकार करें दाती....का निदान!!
तू माहेश्वरी, ललिता, गौरी-पदमा, दुर्गा, महाकाली तू!
तू जगजननी सबकी मैया, सूरज किरणों की लाली तू!!
गूंजे जयकारों से मंदिर-हो नित तेरा गुणगान!
दर्शन तेरे साकार करें दाती....का निदान!!
कठिन तप कर शिव को पाया-ऋषि-मुनियों ने तुझे ध्याया
हुईं मुरादें पूर्ण भक्तों की-दर तेरे जिस मन से आया!!
कमंडल, जपमाला हाथों में-मुकुट-मस्तक विराजमान!
दर्शन तेरे साकार करें दाती....का निदान!!
जागे लौ जप, त्याग की-आराधना जो मन से करता!
भोला-भाला रूप मां तेरा-झोलियां सुखों की भरता!!
कवि ‘झिलमिल’ करे तेरी आरती-दे हमको आत्मज्ञान!
दर्शन तेरे साकार करें दाती...का निदान!!




तृतीय : आरती मां चंद्रघंटा


‘युद्ध मुद्रा मां रूप है तेरा’
तुझको निहारें जी भर मैया-सुन लो दाती करुण पुकार!
मां चंद्रघंटा! शेरों वाली-तेरी जय-जय-जय जयकार!!
तुझको निहारें जी भर मैया ...जय जयकार!!
कोई पुकारे छत्रेश्वरी तुझको-मुकुटेश्वरी, अर्जिता पुकारें!
जिस रूप चाहे जो मैया-तू सबका जीवन संवारे!!
स्वर्ण रूप तन-आभा-दमके-अद्र्धशशि मस्तक चमकार!
तुझको निहारें जी भर मैया...जय-जयकार!!
निडरता मार्ग करे लक्षित-परस्पर प्यार संदेश मिले!
रहें दूर द्वेष, भेदभाव से श्रद्धा-विश्वास परिवेश मिले!!
अस्त्र-शस्त्र दसों हाथ उठाए-त्रिशूल, गदा, धनुष, तलवार!
तुझको निहारें जी भर मैया...जय-जयकार!!
युद्ध मुद्रा मां रूप है तेरा-शेर सवारी, गुफा में डेरा!
सच्चे मन तेरी ज्योति जलाए-आए आंगन सुख का सवेरा!!
कवि ‘झिलमिल’ करें तेरी आरती- तन-मन-धन सौ-सौ बार!
तुझको निहारें जी भर मैया...जय-जयकार!!


चतुर्थ : आरती मां कूष्मांडा


‘अंधकार हरण कर दिया उजाला’
सोहणा-सोहणा भवन मां तेरा-भवतारिणी तेरी माया!
मां कूष्मांडा! जग जननी, सृष्टि सृजना, तेरी छाया!!
सोहणा-सोहणा भवन मां तेरा...तेरी छाया!!
भवानी, कृपालिनी, महादेवी , सुपथा, गौरी, महाकाली तू!
सूर्यलोक की तू स्वामिनी, जोश, उमंग, दे खुशहाली तू!!
अंधकार हरण कर, दिया उजाला-मैया तूने ब्रह्मांड रचाया!
सोहणा-सोहणा भवन मां तेरा...तेरी छाया!!
पाए वरदान यश, बल वृद्धि-शरण तिहारी दीया जलाए!
करे उपासना पावन मन से, घर-आंगन उसका महकाए!!
टपके क्लश से अमृतधारा, झरना प्यार का तूने बहाया!
सोहणा-सोहणा भवन मां तेरा...तेरी छाया!!
कल्याण विश्व का करने वाली, करे सारे जग की रखवाली!
तेरी भक्ति की शक्ति मैया, सबकी झोलियां भरने वाली!
कवि ‘झिलमिल’ करे तेरी आरती-दर तेरे मां शीश झुकाया!
सोहणा-सोहणा भवन मां तेरा...तेरी छाया!!






पंचम : आरती मां स्कंधमाता


 ‘देवासुर संग्राम की बनी सेनापति’
मां की ममता का रूप सिलौना-छवि तेरी अति न्यारी!
मां स्कंधमाता! वात्सल्य देवी-सूरत तेरी लागे प्यारी!!
मां की ममता का रूप सिलौना...लागे प्यारी!!
वैष्णो, अम्बिका, दुर्गा, भवानी-हर रूप तेरा नूरानी!
ब्राह्मणी, पूतना, महादेवी तू-सारी दुनिया तेरी दीवानी!!
बैठे गोद में बाल स्कंध-हो फूलों की जैसे पिटारी!
मां की ममता का रूप सिलौना...लागे प्यारी!!
देवासुर संग्राम की बनी सेनापति-किया देवताओं का उद्धार!
मिले पुराणों में यह वर्णन-शक्तिधर का रूप संचार!!
मोर सवारी, कमल पुष्प बिछौना-भुजाएं वरमुद्रा तिहारी!
मां की ममता का रूप सिलौना...लागे प्यारी!!
द्वार मोक्ष का तू दिखलाती-करे उपासक दिल से आह्वान!
हर विपदा तू हर लेती-मंजिल की बनती सौपान!!
कवि ‘झिलमिल’ करे तेरी आरती-तुझको ध्याए दुनिया सारी!
मां की ममता का रूप सिलौना...लागे प्यारी!!


षष्टम : आरती मां कात्यायनी


‘खडग़धारिणी कलिका, मातंगी तू’
चारों ओर जब पृथ्वी पर-आतंक महिषासुर का था छाया!
लिया अवतार कात्यायनी ने रूप उग्र धारण कर मिटाया!!
चारों ओर जब पृथ्वी पर...कर मिटाया!!
खडग़धारिणी, कलिका, मातंगी तू जगदम्बे महाकाली मैया!
सुपथा, विंध्यवासिनी, बलशाली-लगाई पार सबकी नैया!!
लिया जन्म ऋषि कात्य के घर-सारे जग को चमकाया!
चारों ओर जब पृथ्वी पर...कर मिटाया!!
वर मुद्रा उठा हाथ तुम्हारा-करे जो भक्ति मिले सहारा!
जोत जलाए करे आराधना-साधक पथ फैले उजियारा!!
शेर सवारी करे तू मैया-रूप पराक्रमी सबको भाया!
चारों ओर जब पृथ्वी पर...कर मिटाया!!
पाप-संताप से देती मुक्ति-दिखलाती तू आलौकिक शक्ति!
हर विपदा को हरने वाली-सबकी झोली खुशियों से भरती!!
कवि ‘झिलमिल’ करे तेरी आरती सौ-सौ बार शीश नवाया!
चारों ओर जब पृथ्वी पर...कर मिटाया!!





सप्तम : आरती मां कालरात्रि



‘तू ज्वालामुखी ज्वाला बरसाती’
बिखरे बाल, घनी काली काया-कैसा तूने मां रूप बनाया!
मैया कालरात्रि पुकारे तुझको-जिसने ध्याया, परम सुख पाया!!
बिखरे बाल, घनी काली काया...परमसुख पाया!!
तू ज्वालामुखी ज्वाला बरसाती-वागेश्वरी, अम्बिका कहलाती!
त्रिनेत्री, महाकाली, अर्जिता तू-सब भक्तों की आंख सुहाती!!
करे स्मरण जो दिल से तेरा-घर आंगन उसका महकाया!
बिखरे बाल, घनी काली काया...परमसुख पाया!!
भूत-पिशाच निकट न आते-श्रद्धा से तेरी जोत जलाते!
चमकती कटार लिए हाथों में-मोती माला के चम-चमाते!!
गदर्भ की तू करे सवारी-पुण्य का मार्ग दिखालाया!
बिखरे बाल, घनी काली -काया...परमसुख पाया!!
भक्तों का उद्धार करे तू-सपनों को साकार करे तू!
निर्धन-धनवान करे अर्चना-हर विपदा को पल में हरे तू!!
कवि ‘झिलमिल’ करे तेरी आरती-मन दर्शन को अकुलाया!
बिखरे बाल, घनी काली काया...परमसुख पाया!! 





अष्टम : आरती मां महागौरी

वृषभ सवारी भाती तुझको’
जय-जय जगदम्बे महाशक्ति-मनु मनोहर रूप तुम्हारा!
अष्टम रूप तेरा महागौरी-देती तू मां सबको सहारा!!
जय-जय जगदम्बे महाशक्ति...सबको सहारा!
वज्रधारिणी, वैष्णवी, जगजननी-नीलग्रीवा, कामाक्षी, बलशाली!
अम्बा, लक्ष्मी, तू मां दुर्गा-घर आंगन में लाती खुशहाली!!
भागे कोसों दूर दरिद्रता-तन-मन-धन जिसने वारा!
जय-जय जगदम्बे महाशक्ति...सबको सहारा!!
महके फूलों-सा तन दमके-कानों में प्यारे कुंडल चमकें!
वृषभ सवारी भाती तुझको-शंख, त्रिशूल, डमरू हस्तन में!!
सिजदे करे, तेरी जोत जलाए-चमकाए किस्मत का तारा!
जय-जय जगदम्बे महाशक्ति...सबको सहारा!!
हर मुश्किल को आसां करती-भक्तों की तू झोलियां भरती!
तिलक लगाए तुझे पुष्प चढ़ाएं- कदम-कदम हर विपदा हरती!!
कवि ‘झिलमिल’ करे तेरी आरती-चले तेरे दम जहां ये सारा!
जय-जय जगदम्बे महाशक्ति....सबको सहारा!!




नवम : आरती मां सिद्धिदात्री


‘सबको देने आई वरदान सिद्धिदात्री’
जप लो, जप लो प्यारे भक्तो-जप लो शेरों वाली का नाम!
नवरात्र नवम रूप सिद्धिदात्री-आई देने सबको वरदान!!
जप लो, जप लो प्यारे भक्तो...सबको वरदान!
मंगला, मनसा, ललिता, मुकुटेश्वरी-तू सारे जग की राजेश्वरी!
वज्रहस्ता, योगिनी, नारायणी-गौरी, लक्ष्मी तू हृदयेश्वरी!!
सौ हाथ तेरे देने वाले-अजब आलौकिक तेरी शान!
जप लो, जप लो प्यारे भक्तो...सबको वरदान!!
तू अमृत का रसपान कराए-लौ जिसको तेरी लग जाए!
मिले आंचल की शीतल छाया-मनवांछित मंजिल मिल जाए!!
लाखों भक्त मां ध्याएं तुझको-देना सफलताओं की सौपान!
जप लो, जप लो प्यारे भक्तो...सबको वरदान!!
चक्रधारिणी, शंख वादिनी मैया-रिद्धि-सिद्धि से करे भरपूर!
ओढ़े आंगन रंग बसंती चोला-महके चमन मैया तेरे नूर!!
कवि ‘झिलमिल’ करे तेरी आरती-करना क्षमा बंदा मैं अनजान!
जप लो, जप लो प्यारे भक्तो...सबको वरदान!!

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