Tuesday, 2 April 2013

सुसंस्कार कैसे हो?

सभी अभिभावक चाहते है की उनका बच्चा सुसंस्कारित हो,बच्चे की प्रथम पाठशाला और शिक्षक होते हैं उसके माता-पिता। आदर्श जीवन का तत्त्वज्ञान बच्चों को सिखाना होता है। बच्चे को जीवन के लिए दिशा दर्शन करने वाला सर्व संस्कार धार्मिकता के आधार पर ही होने चाहिए । 

आज के अधिकांश अभिभावक पश्चिमी संस्कृति की धुन पर भोगवादी बन गये है। अत: उनके प्रभाव से बच्चों पर भी उन्हीं विचारों का प्रभाव पड़ता है। पश्चिमी संस्कृति के आक्रमण एवं स्वसंस्कृति के विस्मरण के कारण आज के बच्चे किसी की सुनते ही नहीं है। ये सुसंस्कार कैसे हो? इनकी शुरूआत करें अपने बच्चे के जन्मदिन मनाने की पद्धति से पाश्चत्य की धुन पर थिरकने की बजाय भारतीय मान्यताओं के अनुरूप-
  
-जन्मदिन पर स्नान करने के बाद नए वस्त्र पहनें। 

-माता-पिता तथा बड़ों का आर्शीवाद लें।

-कुलदेवता अथवा कुलदेवी की पूजा करें अगर संभव हो तो उनका अभिषेक करें।

-अपने इष्ट देवता की नाम माला जाप करें।

-दान-पुण्य करें।

-माता को चाहिए बच्चे के जन्मदिन पर उसकी आरती उतारें। 

-आरती के उपरांत कुलदेवता अथवा अपने इष्ट का स्मरण कर बच्चे के सिर पर तीन बार अक्षत डालें।

-फिर उसे मिठाई अथवा घर पर कोई मीठा पदार्थ बना कर खिलाएं ।

-बच्चे की मंगलकामना के लिए प्रार्थना करें। 

-अंत में बच्चे को कुछ भेंट दें,बच्चा ईश्वर से मिला हुआ प्रसाद जान कर मिले हुए तोहफो को सिर माथे पर लगाए।

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