Friday, 28 June 2013

माता धारा देवी



इसे चाहें तो अंधविश्वास कहें या महज एक संयोग! उत्तराखंड में हुई तबाही के लिए जहां लोग प्रशासन की 

लापरवाही को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं वहीं उत्तराखंड के गढ़वाल वासियों का मानना है कि माता धारा देवी के   

प्रकोप से ये महाविनाश हुआ.
धारी  देवी  माता 

ऊखी मठ  केदारनाथ

इसे चाहें तो अंधविश्वास कहें या महज एक संयोग! उत्तराखंड में हुई तबाही के लिए जहां लोग प्रशासन की 

लापरवाही को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं वहीं उत्तराखंड के गढ़वाल वासियों का मानना है कि माता धारा देवी के 

प्रकोप से ये महाविनाश हुआ.देखें वह विडिओ 



मां काली का रूप माने जाने वाली धारा देवी की प्रतिमा को 16 जून की शाम को उनके प्राचीन मंदिर से हटाई 

गई थी. उत्तराखंड के श्रीनगर में हाइडिल-पॉवर प्रोजेक्ट के लिए ऐसा किया गया था. प्रतिमा जैसे ही हटाई गई 

उसके कुछ घंटे बाद ही केदारनाथ में तबाही का मंजर आया और सैकड़ों लोग इस तबाही के मंजर में 

मारे गए.   





विश्व हिंदू परिषद के अशोक सिंघल ने कहा, 'लोगों ने हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट के खिलाफ प्रदर्शन किया था और 

धारा देवी की प्रतिमा को हटाए जाने का विरोध किया था. लेकिन इसके बावजूद 16 जून को धारा देवी की 

प्रतिमा को हटाया गया. धारा देवी के गुस्से से ही केदारनाथ और उत्तराखंड के अन्य इलाकों में तबाही मची. 

धारा देवी देश के नास्तिक लोगों को समझाना चाहती थीं कि हिमालय और यहां की नदियों को ना छुआ 

जाए.'


इस इलाके में धारा देवी की बहुत मान्यता है. लोगों की धारणा है कि धारा देवी की प्रतिमा में उनका चेहरा 

समय के साथ बदला है. एक लड़की से एक महिला और फिर एक वृद्ध महिला का चेहरा बना.

पौराणिक धारणा है कि एक बार भयंकर बाढ़ में पूरा मंदिर बह गया था लेकिन धारा देवी की प्रतिमा एक 

चट्टान से सटी धारो गांव में बची रह गई थी. गांववालों को धारा देवी की ईश्वरीय आवाज सुनाई दी थी कि 

उनकी प्रतिमा को वहीं स्थापित किया जाए. यही कारण है कि धारा देवी की प्रतिमा को उनके मंदिर से हटाए 

जाने का विरोध किया जा रहा था. यह मंदिर श्रीनगर से 10 किलोमीटर दूर पौड़ी गांव में है.


330 मेगावाट वाले अलखनंदा हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट का काम अभी भी जारी है. लोगों के विरोध के चलते ही ये 

प्रोजेक्ट जो 2011 तक पूरा हो जाना चाहिए था अभी तक इस पर काम चल रहा है. जैसे ही धारा देवी की प्रतिमा 

को स्थानांतरित करने की बात शुरू हुई प्रोजेक्ट को लेकर लोगों का विरोध नए स्तर से शुरू हो गया. बीच का 

रास्ता निकालते हुए प्रोजेक्ट ने फैसला लिया कि पॉवर प्रोजेक्ट से दूर धारा देवी के मंदिर को स्थानांतरित 

किया जाएगा. धारा देवी की प्रतिमा को स्थानांतरित करने के लिए प्लेटफॉर्म बन चुका था लेकिन पॉवर 

प्रोजेक्ट कंपनी और मंदिर कमिटी के लिए उनकी मूर्ति को विस्थापित करना मुश्किल होता जा रहा था.

16 जून को जब मंदाकिनी नदी में बाढ़ आना शुरू हुई तो मंदिर कमिटी ने धारी देवी की प्रतिमा बचाने के लिए 

तुरंत एक्शन लिया. धारा देवी मंदिर कमिटी के पूर्व सचिव देवी प्रसाद पांडे के मुताबिक, 'शाम तक मंदिर में 

घुटने तक पानी भर गया था. ऐसी खबरें थीं कि रात तक बहुत तेज बारिश होने वाली है. तो धारा देवी की 

प्रतिमा को हटाने के अलावा कोई और रास्ता नहीं था. हमने शाम को 6:30 बजे प्रतिमा को 

स्थानांतरित किया था.'  
[अब चुनौती उत्तराखंड  पुनर्निर्माण की है। एक तरफ जहां पुरातत्व 

विभाग की एक टीम केदारनाथ मंदिर को फिर से 

पहले जैसा रूप देने को तत्पर है, वहीं पर्यावरणविदों ने प्रकृति से 

छेड़छाड़ न करने की सलाह दी है।]


[ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के विशेषज्ञों की एक टीम बाढ़ के प्रकोप से केदारनाथ मंदिर को हुए नुकसान का 

जायजा लेने और इसे फिर से पहले जैसा रूप देने के लिए जरूरी चीजों का अध्ययन करने इस पवित्र धाम का दौरा करेगी। 

इस टीम में देहरादून और दिल्ली के पांच विशेषज्ञ होंगे।  इसी बीच पर्यावरणविदों का कहना है कि अब वक्त है प्रकृति से 

छेड़छाड़ बंद करने का। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पर्यावरणविद किशोर उपाध्याय का कहना है कि देश ने उत्तरकाशी और 

जम्मू कश्मीर में आए भूकंप से सीख नहीं ली है। ]




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